असम में तीसरे और आखिरी चरण के चुनाव अभी हाल ही में संपन्न हुए। कश्मीर के बाद असम दूसरा वो राज्य है जहां मुस्लिम आबादी की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक असम में मुस्लिम आबादी में सबसे ज्यादा बढोतरी दर्ज हुई है। जो 2001 में 30.9 प्रतिशत से बढ़कर 2011 में 34.2 प्रतिशत हो गई। ये वोटर्स हर चुनाव में मतदान करने के लिए मतदान केंद्रों पर जाते हैं। जिसका एक बड़ा कारण है डी ( संदिग्ध) वोटर होने के रूप में चिन्हित होने का डर। 34 निर्वाचन क्षेत्र जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा है वहां 84 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। शेष 92 निर्वाचन क्षेत्रों में जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या नगण्य है, औसत मतदान प्रतिशत 79 था। इस चुनाव में राज्य का औसत मतदान प्रतिशत 82% था। लेकिन मुस्लिम मतदाताओं के बहुतायत वाले सात निर्वाचन क्षेत्रों में 90% से अधिक मतदान हुआ और तीन अन्य मुस्लिम आबादी वाले इलाकों में 89% वोटिंग हुई।
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2016 के चुनाव में इन दस सीटों में से चार पर कांग्रेस और छह पर एआईयूडीएफ को जीत मिली थी। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार अल्पसंख्यक छात्र नेता और असम के अल्पसंख्यक छात्र संघ (AMSU) के पूर्व सलाहकार अजीज़ुर रहमान, जो नोबोइचा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, उनका कहना है कि मतदान के दिन मुसलमानों का मतदान हमेशा अन्य समुदायों के मतदाताओं से अधिक रहा क्योंकि वे पार्टियों और उम्मीदवारों से बहुत प्रभावित होते हैं। रहमान ने कहा कि अन्य लोगों के विपरीत, मुस्लिम (बंगाली भाषी प्रवासी) कम शिक्षित, गरीब हैं और सामूहिक रूप से अपना निर्णय लेते हैं। बड़ी संख्या में हमेशा उनके सामने आने का एक और कारण है कि वे डर में रहते हैं ... अगर वे वोट नहीं देते हैं तो उन्हें मतदाता सूची में 'डी मतदाता' के रूप में चिह्नित किया जाएगा।
क्या है डी वोटर
वोटर लिस्ट की जांच के दौरान डी वोटर या संदिग्ध वोटर के रूप में कुछ वोटर चिन्हित किए गए हैं। ये ऐसे लोग हैं जिनका मामला फॉरेनर्स ट्राइब्यूनल में चल रहा है या उन्हें ट्राइब्यूनल ने विदेशी नागरिक घोषित किया है।
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