नयी दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय में बुधवार को एक जनहित याचिका दाखिल कर केंद्र और दिल्ली सरकार को कोविड-19 टीकाकरण में दिव्यांग लोगों को प्राथमिकता देने और उनके लिए विशेष प्रावधान करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया। मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने दो दिव्यांगों की इसयाचिका पर स्वास्थ्य मंत्रालय और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किये। अधिवक्ता सिद्धार्थ सीम और जॉएसी के जरिए दाखिल याचिका में उन्होंने दलील दी है कि कोविड-19 टीकाकरण में दिव्यांगों को प्राथमिकता के लिए प्रावधान नहीं किया जाना ऐसे लोगों को तरजीह देने के लिए संविधान की भावना का उल्लंघन है। एक याचिकाकर्ता काइफो सोलियोसिस (रीढ़ की हड्डी का असामान्य रूप से टेढ़ा होना) से ग्रसित हैं। इसके अलावा उनका बायां कंधा पोलियो ग्रस्त है और वह एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। दूसरे याचिकाकर्ता मिश्रित सेरेब्रल पाल्सी क्वाड्रिप्लेजिया से पीड़ित हैं जिससे उनमें 90 फीसदी स्थायी शारीरिक अपंगता आ गयी है।
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याचिका में दलील दी गयी है, ‘‘प्रतिवादियों (केंद्र और दिल्ली सरकार) द्वारा जारी टीकाकरण के दिशानिर्देश एवं नियमों में दिव्यांगों का उल्लेख नहीं किया गया है जो शारीरिक रूप से दिव्यांग लोगों के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।’’ याचिका में कहा गया है कि शारीरिक रूप से दिव्यांग लोगों को संक्रमण का अत्यधिक खतरा रहता है क्योंकि वे अपनी निजी जरूरतों के लिए अन्य के साथ करीबी संपर्क में रहते हैं। शारीरिक रूप से दिव्यांग लोगों को टीकाकरण में प्राथमिकता के अलावा याचिकाकर्ताओं ने सभी दिव्यांगों और उनकी देखभाल करने वालों को उम्र की सीमा से हटकर मुफ्त टीकाकरण का अनुरोध किया है। याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि शारीरिक रूप से दिव्यांग लोगों और उनकी देखभाल करने वालों को टीकाकरण के लिए को-विन ऐप पर पंजीकरण से छूट दी जाये और परित्यक्तों एवं असहाय दिव्यांगों के लिए काम करने वाली सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं के संस्थानों में टीकाकरण अभियान चलाया जाये।
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