दर्दनाक: यूपी के उन्नाव में नदी किनारे मिली सैकड़ों लाशें, आवारा कुत्ते खा रहे हैं शवों का मास https://ift.tt/eA8V8J

एक मृत शरीर का आंतिम संस्कार करना एक आत्मा को मुक्ती दिलाने जैसा माना जाता है। कोरोना काल में हालात ऐसे हो गये कि इंसान की सांसे तो छिन ही गयी लेकिन लोगों के शरीर को उनका आखिरी 'अंतिम संस्कार' का अधिकार भी प्राप्त नहीं हुआ। सरकार की बेदम व्यवस्था ने लोगों का दम निकाल कर रख दिया। सिस्टम की नाकामी और हालात के मारे लोग अपनों को लेकर इधर-उधर भटकते रहे लेकिन सरकार की खोखली व्यवस्था उन्हें ऑक्सीजन का एक कतरा न दे सकी। कोरोना की इस त्रासदी लोगों को खून के आंसू रोने पर विवश कर दिया। वहीं दूसरी तरफ सरकारे एक दूसरे पर आरोप लगाती रही। 

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सोचिए कोरोना में हालात कितने विभत्स है जो लोगों को अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने के लिए भी जगह नहीं मिली। शमशान में कई दिनों तक इंतजार करने के बाद लोगों ने विवश होकर अपनों के शवों को नदी में डूबों दिया। अब गंगा नदी में डुबोए गये शव गंगा किनारों पर तैर कर आ रहे हैं। गंगा किनारों पर एक साथ- 50-60 लाशें बह कर इकठ्ठा हो रही है। ये मंजर बहुत ही भयानक है।  लाशों की हालत देश कर कलेजा फट जाता है। 

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बिहार के गंगा नदी में शव तैरते पाए जाने के कुछ ही दिन बाद अब उत्तर प्रदेश के कई जिलों में ये मंजर देखा जा रहा है। उन्नाव जिले में भी ऐसी ही घटनाएँ देखने को मिल रही हैं। उन्नाव के एक गांव में नदी के किनारे रेत में सेकड़ों शवों को दफनाया गया है। हवा से नदी किनारे की रेत उड़ जाने के कारण शव दिखाई देने लगे। इस शवों को आवारा कुत्ते खा रहे हैं। ये दृश्य बेहद ही दर्दनाक है। 
 
अभी तक इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई है कि शवों को वहां दफनाया गया था या पास के इलाकों से यहां बह कर आये हैं। शवों की स्थिति को देखते हुए, यह संभावना है कि उन्हें रेत में दफन किया गया था। उन्नाव के जिला मजिस्ट्रेट के अनुसार, बक्सर तीन जिलों- फतेहपुर, राय बरेली और उन्नाव के लिए एक प्रमुख दाह संस्कार स्थल है। जबकि कुछ लोग शव जलाते हैं, अन्य लोग नदी के पासरेत में शवों को दफनाते हैं। 
 
डीएम ने कहा कि उन्होंने घटना के बारे में एसडीएम (सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट) और सीओ (सर्कल ऑफिसर) को सूचित कर दिया है और उचित जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

चूंकि कोविड -19 की वजह से मौत का सिलसिला जारी है, इसलिए उन्नाव में नदी के किनारे अंतिम संस्कार किए गए हैं। लेकिन अंतिम संस्कार की चिता के लिए जंगल से बाहर श्मशान घाटों के साथ, शवों को अब गंगा नदी के किनारे रेत में दफन किया जा रहा है। 


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