बाबर को नहीं इस स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी को समर्पित होगी अयोध्या की मस्जिद https://ift.tt/eA8V8J

5 अगस्त 2020 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा भूमि पूजन के प्रश्चात अयोध्या में प्रभु राम का दिव्य और भव्य मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। मंदिर निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रहा है। 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के रामलला के नाम जमीन के हक पर फैसले के साथ ही एक और बता कही गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद के लिए केंद्र व राज्य सरकार को अयोध्या में ही पांच एकड़ जमीन सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या के धन्नीपुर गांव में मस्जिद के लिए जमीन आवंटित की। अब मस्जिद के निर्माण का कार्य भी जल्द ही शुरू होने जा रहा है। धनीपुर गांव में पांच एकड़ जमीन में बनने वाली मस्जिद का डिजाइन एडवांस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और यह बिना किसी गुंबद के गोलाकार होगा। 

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 मुगल शासक बाबर को नहीं इन्हें समर्पित होगी नई मस्जिद
अयोध्या में बनने वाली मस्जिद मुगल शासक बाबर को नहीं बल्कि प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी के नाम पर रखा जाएगा। अयोध्या में बनने वाली मस्जिद और अस्पताल का नाम मौलवी अहमदुल्लाह शाह फैजाबादी के नाम पर होगा। अहमदुल्लाह शाह फैजाबादी एक स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी थे। अहमदुल्लाह की मौत करीब 164 साल पहले हुई थी। इंडो-इस्लामिक कल्चर फाउंडेशन के मुताबिक अहमदुल्लाह ने अवध को ब्रिटिश हुकूमत से मुक्त कराने के लिए आंदोलन चलाया था। आईआईसीएफ ने अयोध्या में बनने वाली मस्जिद, अस्पताल, संग्रहालय, रिसर्च केंद्र और सामुदायिक रसोई का नाम उनके नाम पर रखा है। 

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हिंदू-मुस्सिम भाईचारे के प्रतीक थे अहमदुल्लाह शाह फैजाबादी

इंडो स्लामिक कल्चर फाउंडेशन के सचिव अतहर हुसैन के मुताबिक मौलवी अहमदुल्लाह शाह फैजाबादी के शहीद दिवस पर हमने उनके नाम पर ही सभी परियोजनाओँ की शुरुआत करने का फैसला लिया है। जनवरी में हमने मौलवी फैजाबादी को शोध केंद्र में समर्पित किया, जो हिंदू-मुस्सिम भाईचारे के प्रतीक थे। आजादी की पहली लड़ाई के 160 साल बाद अहमदुल्लाह शाह फैजाबादी को भारतीय इतिहास में अभी तक वो हक नहीं मिला। मस्जिद सराय, फैजाबाद, जो 1857 के विद्रोह के दौरान मौलवी का मुख्यालय थी, वही एकमात्र जीवित इमारत है, जो उनके नाम पर संरक्षित है। 
 मौलवी की हत्या कर उनके सिर को अंग्रेजों के सामने पेश किया गया
मौलवी अहमदुल्लाह शाह को जीते जी अंग्रेज नहीं पकड़ पाए थे और उनको पकड़ने के लिए 50 हज़ार चांदी के सिक्के की घोषणा की थी। इसके बाद  शाहजहांपुर के राजा जगन्नाथ सिंह ने मौलवी की हत्या कर उनके सिर को अंग्रेजों के सामने प्रस्तुत किया था और इनाम के तौर पर उन्हें 50 हजार चांदी के सिक्के मिले थे। 



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