BSP के मंच से लगे 'जय श्री राम' के नारे, सतीश चंद्र मिश्रा बोले- मंदिर नहीं बनवाना चाहती BJP https://ift.tt/eA8V8J

अयोध्या। बसपा के चुनाव चिह्न हाथी को लेकर बीएसपी महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि यह हाथी नहीं, गणेश हैं। ब्रह्मा, विष्णु, महेश हैं। उन्होंने कहा कि बसपा सरकार जब बनी थी तो 62 सीटों पर ब्राह्मणों ने जीत दर्ज की थी, जिसके कारण बसपा बहुमत में आई थी।  
बसपा ने रामनगरी अयोध्या से विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंका और मंच से ब्राह्मणों को एक करने की कोशिश की। सम्मेलन की शुरुआत वैदिक मंत्रों से हुई तो अंत जय श्रीराम के नारों से। मंच से बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने भाजपा पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा राम मंदिर बनाना ही नहीं चाहती और जब 2022 में बसपा की सरकार बनेगी तो भाजपा को राममंदिर बनाने के लिए मजबूर कर देगी। सतीश चंद्र ने कहा कि प्रदेश और केंद्र में भाजपा की सरकार थी, लेकिन राम मंदिर के लिए कुछ नहीं किया गया। अब जो कुछ भी हो रहा है, वह सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से हो रहा है।  साल बीत गया, लेकिन अभी तक भाजपा राम मंदिर की नींव भी नहीं बना सकी।
सतीश चंद्र मिश्र ने कहा कि प्रदेश में 13% ब्राह्मण हैं और यह सभी हाशिये पर हैं। बसपा ब्राह्मणों को सम्मान दिलाएगी और इसके लिए ब्राह्मणों को एकजुट होना पड़ेगा। सतीश मिश्रा ने कहा कि 13% ब्राह्मण और 23% दलित अगर एक हो गया तो 2022 में सरकार बनने से कोई रोक नहीं पाएगा। बसपा के चुनाव चिह्न हाथी को लेकर सतीश मिश्रा ने कहा कि यह हाथी नहीं, गणेश हैं। ब्रह्मा, विष्णु, महेश हैं।उन्होंने कहा कि बसपा सरकार जब बनी थी तो उसमें 62 सीटों पर ब्राह्मणों ने जीत दर्ज की थी, जिसके कारण बसपा बहुमत में आई थी।सरकार में रहते हुए बसपा ने 2200 ब्राह्मणों को सरकारी वकील बनाया था। ब्राह्मण अधिकारियों को भी उचित तैनाती दी गई थी। प्रदेश के ब्राह्मणों का आह्वान करते हुए सतीश मिश्रा ने कहा कि जिस तरह से प्रदेश में ब्राह्मणों की हत्या हुई है, उससे अब ब्राह्मण सबक लें। सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि अमर दुबे की पत्नी खुशी दुबे की क्या गलती थी। 48 घंटे भी उसे आए नहीं हुए थे और उसे जेल में डाल दिया गया। मुख्यमंत्री को खुद इसको संज्ञान में लेना चाहिए था।
दरअसल 2022 के चुनाव को लेकर बसपा पूरी राममय हो गई है। अब आस्था की डगर पर चलने के लिए मजबूर बसपा पहले फेज में अयोध्या, दूसरे फेज में मथुरा और तीसरे फेज में काशी विश्वनाथ जाकर ब्राह्मण सम्मेलन करेगी। यही नहीं, रामनगरी अयोध्या पहुंचे सतीश चंद्र मिश्रा ने अपने संबोधन के अंत में जय श्रीराम के नारे भी लगाए। सवाल यह उठता है कि जब यही बसपा दलित के बीच जाकर ब्राह्मणों की बुराई करती थी तो क्या अब ब्राह्मणों की तारीफ क्या दलितों को हजम होगी। यह तो वक्त बताएगा लेकिन सत्ता पाने की छटपटाहट आस्था की डगर पर बसपा को आने के लिए मजबूर कर रही है।



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