अयोध्या। भगवान शिव को जलाभिषेक करने बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे जहां सरयू नदी में स्नान के बाद पवित्र जल से सरयू घाट स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग नागेश्वर नाथ मंदिर में स्थित भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। श्रावण मास की त्रयोदशी बड़ा ही महत्वपूर्ण दिन माना जाता है आज के दिन बड़ी संख्या में कांवड़ यात्रा लेकर शिव भक्त अपने भोलेनाथ के मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं लेकिन 2 वर्षों से चल रहे कोरोना काल के कारण कावड़ यात्रा पर रोक लगी हुई है।
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श्रावण मास के कृष्ण पक्ष त्रियोदशी जिसे जल चढ़ी तेरस भी कहा जाता है। इस मौके पर बड़ी संख्या में शिव भक्त श्रद्धालु ने जल भर कर भगवान भोलेनाथ को जलाभिषेक करते हैं। ऐसी मान्यता है कि आज ही के दिन भगवान शिव सृष्टि को बचाने के लिए समुद्र मंथन से निकले विश को धारण किया था जिसके कारण पूरी दुनिया में उथल-पुथल मच गया था उनके शरीर को शांत करने के लिए भक्तों के द्वारा जलाभिषेक किए जाने की परंपरा शुरू हुई। जो कि आज भी भक्त इस परंपरा को निभाने के लिए शिव मंदिरों में जलाभिषेक कर रहे हैं।
श्रावण मास में भगवान शिव के भक्तों के द्वारा कावड़ यात्रा की परंपरा की शुरुआत की बड़ी संख्या में शिव भक्त एक विशेष भगवा रंग के वस्त्र धारण कर और अपने कंधों पर जल को लेकर यात्रा प्रारंभ करते हैं इस दौरान डीजे की धुन पर नाचते गाते शिव भक्त अपने भक्ति अनुसार भगवान भोलेनाथ के विभिन्न ज्योतिर्लिंगों पर पहुंचकर जलाभिषेक व पूजन करते हैं लेकिन इस बार भी कोरोना संक्रमण को देखते हुए प्रदेश सरकार ने कांवड़ यात्रा पर रोक लगा दिया है। उन लोगों से अपील की है कि अपने घर के निकट के ही मंदिरों पर जलाभिषेक करें इस दौरान सोशल डिस्टेंस व मास्क का जरूर ख्याल रखें।from Hindi News - News in Hindi - Latest News in Hindi | Prabhasakshi https://ift.tt/3Cjj0AV
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