हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में जिंदगी को पटरी पर लाने के लिये दिन रात जद्दोजहद जारी है । कुदरत ने जो जख्म दिये हैं उन्हें याद कर लोग सहम जाते हैं । सीमा सड़क संगठन के अलावा आईटीबीपी के जवान यहां डटे हैं ताकि रास्ते बहाल हो सके । कई इलाकों का संपर्क कटा हुआ वहां अस्थाई पुल बनाये जा रहे हैं । ताकि आम लोगों की कठिनाइयां दूर हो सके। यहां फंसे बाहरी पर्यटकों को निकाला जा चुका है।लेकिन किसान इस बात को लेकर चिंतित हैं कि जल्द रास्ते बहाल न हुये उनकी फसलें तबाह हो जायेंगी।
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कुदरती कहर ऐसे समय में आया है जब यहां फसलें लगभग तैयार हैं । पूर्व विधायक रवि ठाकुर कई दिनों से यहां डेरा डाले हैं बताते हैं कि सबसे अधिक नुक्सान तो उदयपुर की मयाड घाटी में हुआ लेकिन सीएम वहां गये ही नहीं जहां गए वहां लोगों से मिले नहीं न ही सरकार ने कोई राहत पैकेज की घोषणा अब तक की है सीएम हेलीकॉप्टर से उतरे व लोगों का दर्द समझें हिमाचल सरकार और प्रशासन का सुस्त रवैया है लोगों की सुध लेने वाला कोई नहीं। हमारी हिमाचल प्रदेश सरकार से अपील है जल्द लोगों की मांग को मान कर उनकी मदद की जाए।कांग्रेस नेता कुंगा बोध ने बताया कि लाहौल घाटी की गोभी ,मटर,ब्रोकली व आईसबर्ग की फसल की मांग दिल्ली तक है सब्जियां इस बार नहीं जा पा रही हैं सितंबर में हमारा आलू तैयार होगा लेकिन यह बाहर जा ही नहीं पायेगा।
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प्रदेश के तकनीकी शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी एवं जनजातीय विकास मंत्री डॉ राम लाल मारकंडा ने बाढ़ से प्रभावित हुए चोखंग,गवाडी, नैनगार गांव का दौरा किया और नुकसान का जायजा लिया। मारकंडा पिछले दिनों से यहां ही डटे हैं हालांकि उन्हें आज शिमला जाना था। डॉ मारकंडा ने बताया कि बाढ़ के कारण सड़क व फसल का बहुत नुकसान हुआ है। पानी के कुलह भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को नुकसान का आंकलन करने के निर्देश दे दिए हैं। उन्होंने सभी प्रभावित लोगों से बातचीत की और विश्वास दिलाया कि सभी को हर संभव सहायता दी जाएगी। तथा आपदा की इस मुश्किल घड़ी में सरकार आपके साथ है, मुख्यमंत्री स्वयं यहां का जायज़ा ले चुके हैं। उधर ,एसडीएम उदयपुर राजकुमार ठाकुर ने आज चांगुट, करपट व चुरपुट गावों का दौरा किया। उन्होंने कहा कि इन गांवों में सभी अपने घरों में सुरक्षित, खाने के लिए पर्याप्त राशन व अन्य जरुरत का सामान की कोई कमी नहीं है, इसके बावजूद भी प्रचुर मात्रा में चावल, आटा, दाल, चीनी, सूखा दूध इत्यादि पहुंचा दिए गए हैं।
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उन्होंने कहा कि भारी बाढ़ और बारिश के बाद उदयपुर उपमंडल में पर्यटकों व अन्य बाहरी लोगों को निकालने का रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा था। उसकी जिम्मेदारी एसडीएम उदयपुर को दी गई थी। जिसमें व्यस्त रहने के कारण मौके पर पटवारी को भेजा गया था और पटवारी की सूचना के अनुसार कोई भी परिवार ऐसा नहीं पाया गया जो घर के बाहर रह रहा हो। स्थानीय किसी व्यक्ति ने भी इस तरह के मामले को लेकर कोई जानकारी राजस्व विभाग को नहीं दी।
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