केरल हाईकोर्ट का बड़ा बयान, पत्नी के शरीर को पति द्वारा अपनी संपत्ति समझना वैवाहिक बलात्कार है https://ift.tt/eA8V8J

कोच्चि। केरल उच्च न्यायालय ने कहा है कि पत्नी के शरीर को पति द्वारा अपनी सम्पत्ति समझना और उसकी इच्छा के विरुद्ध यौन संबंध बनाना वैवाहिक बलात्कार है। अदालत ने पारिवारिक न्यायालय के तलाक की मंजूरी देने के फैसले को चुनौती देने वाली एक व्यक्ति की दो अपीलें खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। न्यायमूर्ति ए. मोहम्मद मुस्ताक और न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ की खंडपीठ ने कहा कि शादी और तलाक धर्मनिरपेक्ष कानून के तहत होने चाहिए और देश के विवाह कानून को फिर से बनाने का समय आ गया है।

इसे भी पढ़ें: मध्यप्रदेश: अशोकनगर में बाढ़ में फंसे 40 लोगों को बचाने के लिए NDRF टीम पहुंची

पीठ ने कहा, ‘‘दंडात्मक कानून के तहत वैवाहिक बलात्कार को कानून मान्यता नहीं देता, केवल यह कारण अदालत को तलाक देने के आधार के तौर पर इसे क्रूरता मानने से नहीं रोकता है। इसलिए, हमारा विचार है कि वैवाहिक बलात्कार तलाक का दावा करने का ठोस आधार है।’’ अदालत ने क्रूरता के आधार पर तलाक की याचिका स्वीकार करने वाले पारिवारिक न्यायालय के फैसले के खिलाफ पति की अपील खारिज कर दी। इसके अलावा अदालत ने पति द्वारा वैवाहिक अधिकारों की मांग करने वाली एक अन्य याचिका को खारिज कर दिया।

इसे भी पढ़ें: दिल्ली के सभी सरकारी स्कूलों में लागू किया जाएगा देशभक्ति पाठ्यक्रम

अदालत ने अपने 30 जुलाई के आदेश में कहा, ‘‘पत्नी के शरीर को पति द्वारा अपनी संपत्ति समझना और उसकी इच्छा के विरुद्ध यौन संबंध बनाना वैवाहिक बलात्कार है।’’ इस दंपत्ती की शादी 1995 में हुई थी और उनके दो बच्चे हैं। अदालत ने कहा कि पेशे से डॉक्टर पति ने शादी के समय अपनी पत्नी के पिता से सोने के 501 सिक्के, एक कार और एक फ्लैट लिया किया था। पारिवारिक न्यायालय ने पाया कि पति अपनी पत्नी के साथ पैसे कमाने की मशीन की तरह व्यवहार करता था और पत्नी ने विवाह की खातिर उत्पीड़न को सहन किया, लेकिन जब उत्पीड़न और क्रूरता बर्दाश्त से परे पहुंच गई तो उसने तलाक के लिए याचिका दायर करने का फैसला किया।



from Hindi News - News in Hindi - Latest News in Hindi | Prabhasakshi https://ift.tt/2VzysZd

Post a Comment

0 Comments