मेरठ। प्राकृतिक आपदा के साथ विभिन्न कारणों से बर्बाद हुई फसल से हुए नुकसान से बचाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का सहारा दिया गया था। लेकिन सरकारी अनदेखी व उपेक्षा के कारण योजना जनपद में एक तरह से बंद होने के कगार पर पहुंच गई है। यहां दो लाख से अधिक किसान होने के बाद भी वर्तमान में योजना का एक भी पात्र नहीं है।
किसानों की आय दोगुनी करने की योजना के तहत प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की गई। योजना के तहत काफी कम प्रीमियम जमा कराने पर किसानों को अपनी विभिन्न कारणों से बर्बाद हुई फसल की क्षतिपूर्ति की जाती है। लेकिन जनपद में वर्तमान में इस योजना का लाभ पाने के लिए कोई भी किसान पात्र नहीं है। कृषि विभाग के अधिकारी दम तोड़ रही योजना के लिए तमाम कारण गिना रहे हैं। क्योकि पहले किसान क्रेडिट कार्ड लेने वाले हर किसान के लिए फसल का बीमा कराना अनिवार्य था लेकिन इसके बाद यह पाबंदी हटा ली गई। अब केकेसी लेने वाले किसानों की इच्छा पर है कि वे फसलों का बीमा कराएं या नहीं। इस पाबंदी के हटने का नतीजा रहा कि 2021 में बीमा योजना रसातल में जाती नजर आ रही है।जबकि योजना का लाभ पाने को किसान बीमा लागत का सिर्फ दो फीसदी रकम चुकाता है और बाकी रकम केंद्र और राज्य सरकार देती है।
केंद्र सरकार ने पिछले साल योजना को स्वैच्छिक कर दिया था। दरअसल, किसानों की शिकायत थी कि फसल का नुकसान होने पर बीमा कंपनियां सुनवाई नहीं करती हैं और किसानों के साथ ठगी करती हैं। किसानों को बीमा कराने के बाद भी योजना का लाभ नहीं मिल पाता है।मेरठ के उप कृषि निर्देशक ब्रिजेश चंद्र ने अनुसार प्रधानमंत्री बीमा योजना को स्वैच्छिक कर दिया है। कई बार किसानों को योजना का लाभ भी नहीं मिल पाता। यहीं कारण है कि जनपद में योजना का लाभ लेने वालों की संख्या लगभग शून्य ही है।
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