पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को इस बात की पुष्टि की कि वह जाति आधारित जनगणना के मुद्दे पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का समय मांगेंगे। जद(यू) नेता कुमार ने हालांकि इस बात पर जोर दिया कि इस मुद्दे पर उनकी पार्टी और केंद्र सरकार का नेतृत्व करने वाली भाजपा द्वारा अपनाए गए अलग-अलग रुख गठबंधन को प्रभावित नहीं करेंगे। कुमार ने नयी दिल्ली से लौटने पर यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा (गठबंधन पर)। बिहार में द्विसदनीय विधानमंडल ने जाति-आधारित जनगणना के समर्थन में दो बार प्रस्ताव पारित किए हैं। दोनों मौकों पर सभी पार्टियों ने इसके पक्ष में मतदान किया है।’’ राजद के नेता तेजस्वी यादव के नेतृत्व में पांच दलों के विपक्षी महागठबंधन के नेताओं ने हाल ही में इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी।
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मुख्यमंत्री ने कहा, कल मैं समय निकालकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखूंगा और मिलने का समय मांगूंगा। मेरे साथ जाने वालों की सूची भी संलग्न की जाएगी।’’ गौरतलब है कि केंद्र ने हाल ही में संसद को सूचित किया था कि वह केवल अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए एक जनगणना कराने के बारे में सोच रहा है, जिससे बिहार में इसकी जोरदार मांग की गई कि ओबीसी को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए, जिसका राज्य की राजनीति पर काफी प्रभाव है। मुख्यमंत्री से जद (यू) के वरिष्ठ नेता उपेंद्र कुशवाहा द्वारा दिन में पहले की गई एक टिप्पणी के बारे में भी पूछा गया कि नीतीश कुमार एक प्रधानमंत्री मैटेरियल हैं।’’ कुमार ने कहा, ‘‘मुझे बिना सोचे विचारे की गई टिप्पणियों में कोई दिलचस्पी नहीं है।
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हालांकि उन्होंने उन अटकलों का भी खंडन किया कि पार्टी के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष कुशवाहा लोकसभा सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से नाराज हैं। शनिवार को नयी दिल्ली में आयोजित जद(यू) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में ललन सिंह पार्टी के शीर्ष पद के लिए चुने गए। उन्होंने आरसीपी सिंह की जगह ली। आर सी पी सिंह ने केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री बनने के बाद जद(यू) अध्यक्ष पद छोड़ दिया था। गौरतलब है कि कुमार के पुराने सहयोगी कुशवाहा कुछ महीने पहले जद(यू) में लौट आए और अपनी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी का पार्टी में विलय कर दिया।
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