एक तरफ कोरोना वायरस महामारी ने देश की खोखली व्यवस्था की पोल खोल दी है जिसे आधार बनाकर नेता वोट मांगते थे, वहीं पोल खुलने के बाद दूसरी तरफ राजनेता अपना दामन साफ दिखाने के लिए एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। महामारी के दौर में नेताओं का काम ज्यादा बढ़ गया है, वह मौके खोजते है कि कैसे दूसरी पार्टी की अलोचना की जाए। साथ खड़े होकर महामारी से लड़ने की बजाए सुबह से रात तक वह एक -दूसरे से ही लड़ रहे हैं। हाल ही में देखा गया क्रिकेटर से राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू लगातार अपनी ही पार्टी कांग्रेस की कड़ी आलोचना करते नजर आये हैं। कई मौके पर उनकी बयानबजी पार्टी के सुरों से अलग दिखाई पड़ी। अब लगता है नवजोत सिंह सिद्धू की बयानबाजी पर कांग्रेस का सब्र टूट गया है। पंजाब के मुख्यमंत्री ने कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सिद्धू को उनकी ही जुबान में जवाब दिया है। पंजाब के मुख्यमंत्री ने क्रिकेटर से राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू को अगले चुनाव में पटियाला में उनके खिलाफ चुनाव लड़ने की चुनौती दी है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दावा किया कि सिद्धू 'कुल अनुशासनहीनता' में लिप्त है।
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पटियाला विधानसभा क्षेत्र से चार बार सीधे जीत चुके सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू को यदि अपने उपर इतना ही विश्वास है तो वह मेरे खिलाफ चुवान लड़े। इसके अलावा ज़ी पंजाबी को दिए एक साक्षात्कार में, अमरिंदर सिंह ने अपने पूर्व कैबिनेट मंत्री पर एक भयंकर हमला किया। उन्होंने कहा कि सिद्धू को जो करना है वह साफ तौर पर करें। जिस तरह से वह पार्टी कीअलोचना कर रहे हैं उससे ये साफ हो रहा है कि वह पार्टी छोड़़ना चाहते हैं। उन्हें अपनी शिकायते साफ तौर पर जाहिर करनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा "मुझे नहीं पता कि वह कहां जाएंगे या किस पार्टी में शामिल होंगे। अकाली दल उनसे नाराज है और बीजेपी उन्हें स्वीकार नहीं करेगी ... इसलिए संभावना है कि AAP का सहारा ले सकते हैं। अगर वह पटियाला से मेरे खिलाफ चुनाव लड़ना चाहते हैं तो हम वहां मिलेंगे।
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उन्होंने कहा कि जनरल जेजे सिंह ने भी कई तरह के खोखले दावे किए थे। पटियाला से उन्होंने मेरे खिलाफ चुनाव लड़ा था और जिस तरह चुनाव के नतीजे आये उन्होंने अपनी सारी लोकप्रियता को डूबों कर रख दिया। सिद्धू का भी वहीं होगा।भाजपा के जनरल (retd) जेजे सिंह, जिन्होंने सीएम के खिलाफ 2017 का चुनाव लड़ा। कैप्टन अमरिंदर सिंह से वह बुरी तरह हारे थे।
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन में उनके अपर्याप्त योगदान के बाद जुलाई 2019 में सिद्धू ने पंजाब कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य प्रभारी हरीश रावत को नवजोत सिंह सिद्धू का काम सौंपा था। दिल्ली में पार्टी अंतरिम प्रमुख सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद रावत ने सीएम से मुलाकात की थी। बाद में उन्होंने सिद्धू को पार्टी का एक महत्वपूर्ण नेता कहा और कहा कि उन्हें जल्द ही राज्य में समायोजित किया जाएगा और उनकी उपस्थिति पार्टी को मजबूत करेगी।
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