दिल्ली में कोरोना वायरस के कारण अस्पतालों ममें मरीजों की सख्यां बढ़ती जा रही है रोजाना सेकड़ों लोग ऑक्सीजन की कमी से अपना दम तोड़ रहे हैं। ऑक्सीजन को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच काफी घमासान मचा। मामला कोर्ट में आने के बाद 6 मई को 730 मिट्रिक टन ऑक्सीजन दिल्ली को मिली। आज फिर दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने सुप्रीम कोर्ट को बताया और कहा कि आज सुबह 9 बजे तक, 89 मिलियन टन ऑक्सीजन दिल्ली सरकार को मिल चुका है और 16 मिलियन टन ऑक्सीजन पारगमन में है।
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अब इस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गया है। कोर्ट ने केंद्र को सख्त निर्देश दिए है कि दिल्ली को रोजाना 700 मिट्रिकक टन ऑक्सीजन जरूर दी जाए। दिल्ली सरकार ने कहा कि कल दिल्ली को पूरी ऑक्सीजन नहीं मिली है उसे केवल 527 मिट्रिक टन ऑक्सीजन ही मिली। दिल्ली ऑक्सीजन के लिए तड़प रही है। ऐसे में कोर्ट ने सख्त निर्देश जारी किए हैं।
उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र से अगले आदेश तक दिल्ली को कोविड-19 के मरीजों के इलाज के लिए रोज 700 मीट्रिक टन तरल चिकित्सीय ऑक्सीजन (एलएमओ) की आपूर्ति करते रहने के लिए कहा। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने राष्ट्रीय राजधानी में चिकित्सीय ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी पर दिल्ली सरकार की दलील पर गौर किया और आगाह किया कि अगर रोज 700 मीट्रिक टन एलएमओ की आपूर्ति नहीं की गई तो वह संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आदेश पारित करेगी। इससे पहले शीर्ष न्यायालय ने इस मुद्दे दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा केंद्र सरकार के अधिकारियों के खिलाफ शुरू की अवमानना कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
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