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दूसरी तरफ बुधवार को राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया था कि झारखंड सरकार ने विशेष अभियान चलाकर पिछले दो सप्ताह में कोरोना संक्रमण से रक्षा के लिए लगभग छह लाख लोगों का टीकाकरण कर दिया और राज्य में टीके की बर्बादी भी साढ़े चार प्रतिशत से घटाकर डेढ़ प्रतिशत तक लाने में सफलता प्राप्त की। प्रवक्ता ने बताया कि टीकाकरण अभियान को और गति देकर टीके की क्षति को कम किया जा रहा है। राज्य सरकार टीकाकरण केन्द्र में यह सुनिश्चित कर रही है कि टीके की खुराकों की क्षति ना हो। इस वर्ष 26 मई तक राज्य में टीके की क्षति 4.5 प्रतिशत के करीब थी, जो घटकर अब 1.5 प्रतिशत से भी कम हो गई है। इससे पूर्व 28 मई को कोविड-19 के टीकों के कथित अपव्यय के बारे में केन्द्र सरकार के ‘गलत’ आंकड़े पर झारखंड सरकार की लिखित आपत्ति के बाद केन्द्र सरकार ने इन आंकड़ों को शीघ्र दुरुस्त करने की बात कही और शीघ्र ही इसके लिए कोविन ऐप पर आंकड़ों को ठीक करने का अधिकार राज्यों को भी देने का आश्वासन दिया गया।
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झारखंड में कोविड-19 के टीकाकरण अभियान के नोडल अधिकारी अंजानेयुलु डोडे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि झारखंड सरकार द्वारा इस सिलसिले में लिखे गये पत्र पर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने झारखंड सहित चार प्रभावित राज्यों के साथ वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से बैठक की और आंकड़ों को दुरुस्त करने पर अपनी सहमति जतायी थी और इसी सहमति के तहत झारखंड को अपने आंकड़े दुरुस्त करने के अधिकार बुधवार को मिल गये हैं और उसे दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया गया है। केन्द्र सरकार के कोविन ऐप पर 27 मई तक झारखंड में इन टीकों के 38.45 प्रतिशत अपव्यय की बात कही गयी थी जबकि इसके उलट राज्य में टीकों का कुल अपव्यय देश के औसत से कहीं कम सिर्फ 4.65 प्रतिशत ही हुआ था। झारखंड के अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अरुण सिंह ने ‘पीटीआई भाषा’ को बताया कि बृहस्पतिवार को केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को इस सिलसिले में पत्र लिख कर कहा गया था कि केन्द्र सरकार कोविन ऐप पर अपने आंकड़ों को तुंरत दुरुस्त करे।
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