आगामी चुनाव में बुजुर्ग पिटाई मामले को भुनाने की टूटी उम्मीद, मामले को ‘जय श्री राम’ का रंग देने वाले सपा नेता पर लगा NSA https://ift.tt/eA8V8J

गाजियाबाद के लोनी इलाके में एक बूढ़े मुस्लिम व्यक्ति के मारपीट का वीडियो ट्विटर पर वायरल हुआ और लोगों ने इसको लेकर तरह-तरह के दावे किए। स्वरा भास्कर और अन्य तथाकथित लिबरल ब्रिगेड की तरफ से इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश भी की गई। लेकिन अब गाजियाबाद के लोनी में बुजुर्ग से मारपीट के मामले को सांप्रदायिक रंग देने के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। आरोपी समाजवादी पार्टी के नेता उम्मेद पहलवान पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगा दिया गया है। बुजुर्ग से मारपीट की घटना को उम्मेद पहलवान ने अपने फेसबुक लाइव के जरिये सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की, लेकिन जब बुजुर्ग के आरोपों की जांच की गई तो फर्जी पाया गया। इस मामले में सोमवार को ही पुलिस ने उम्मेद के खिलाफ रासुका लगाने की तैयारी शुरू कर दी थी। उम्मेद पहलवान को 19 जून को गाजियाबाद पुलिस ने लोनी बॉर्डर पुलिस थाने में उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बाद दिल्ली से गिरफ्तार किया था। पुलिसकर्मी की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इदरीसी ने सामाजिक द्वेष पैदा करने के इरादे से इस वीडियो को अपने फेसबुक अकाउंट के माध्यम से साझा किया। 

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बुजुर्ग से लगवाया फर्जी आरोप
एक स्थानीय पुलिसकर्मी की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि उम्मेद ने अनावश्यक रूप से वीडियो बनाया था जिसमें अब्दुल समद सैफी ने कुछ युवकों द्वारा हमले का दावा किया था। सैफी ने आरोप लगाया था कि युवकों ने उनकी दाढ़ी काट दी और जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर किया। उम्मेद ने मारपीट के लिए हिन्दुओं को जिम्मेदार ठहराने को कहा। उम्मेद ने अपने फेसबुक लाइव पर आरोप लगाया था कि हिन्दुओं ने सैफी की ढाढ़ी काट दी और जय श्री राम बोलने पर मजबूर किया। इस मामले की जब जांच की गई तो सारे मामले फर्जी पाए गए। 
रासुका के तहत दर्ज हुआ मामला
गाजियाबाद पुलिस ने ट्विट करते हुए जानकारी दी कि अभियुक्त उम्मेद पहलवान के विरुद्ध dt16-06-21 को PS लोनी बॉर्डर पर FIR-504/21us153-A/295-A/504/505IPCव 67 IT act पंजीकृत की थी और dt19-06-21 को गिरफ्तार कर जेल भेजा  था। उक्त अभियुक्त पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 की धारा 3 की उपधारा 2 के अधीन (NSA) कार्यवाही की गयी है । बता दें कि एनएसए के तहत मामला दर्ज होने के बाद आरोपी को एक साल तक जेल में बंद किया जा सकता है, जिसकी हर तीन महीने में उच्च न्यायालय द्वारा समीक्षा की जाती है। 


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