महाराष्ट्र के आरे कॉलोनी की तरह ही मध्य प्रदेश से भी पेड़ कटाई का मामला सामने आया है। दरअसल यह मामला बक्सवाहा के जंगलों में पेड़ों की कटाई से जुड़ा है। आदित्य बिड़ला ग्रुप की एस्सेल कंपनी को हीरा खनन के अनुमति मिलने से करीब ढाई लाख पेड़ो की कटाई की नौबत आ गई है। हालांकि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने मामले में सख्त रुख अख्तियार करते हुए कहा बिना वन विभाग की अनुमति के पेड़ों की कटाई ना की जाए। मामले को लेकर नागरिक उपभोक्ता मंच ने याचिका दायर की थी जिसपर सुनवाई करते हुए एनजीटी यह आदेश दिया।
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नागरिक उपभोक्ता मंच ने दायर की थी याचिका
साथ ही एनजीटी ने प्रदेश के प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर फॉरेस्ट को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है बक्सवाहा जंगलों में फॉरेस्ट कंजर्वेशन कानून और इंडियन फॉरेस्ट कानून के प्रावधानों समेत सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का भी पालन करवाया जाए।
मामले में जबलपुर के नागरिक उपभोक्ता मंच ने अपनी याचिका में मांग की थी कि हीरा खनन से वन्य जीवों और पर्यावरण को नुकसान होगा इसलिए हीरा खदान की लीज रद्द की जाए। आपको बता दें कि इस प्रोजेक्ट का विरोध लगातार पढ़ रहा है। पर्यावरण प्रेमी बक्सवाहा के जंगलों में की जाने वाली पेड़ों की कटाई को किसी भी कीमत पर रोकना चाहते हैं।
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27 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
इससे पहले भी पर्यावरण प्रेमी पेड़ो को बचाने के लिए अड़ गए थे। लिहाजा सालों काम बंद करने के बाद कंपनी को वापस लौटना पड़ा था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बक्सवाहा देश का सबसे बड़ा हीरा भंडार है। बक्सवाहा में बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार रहते हैं जिनकी आजीविका का साधन यह जंगल ही है।
ऐसे में अगर यह प्रोजेक्ट आता है तो इन आदिवासी परिवारों का जीव अस्त-व्यस्त हो जाएगा। यह आदिवासी परिवार जंगलों से जंगली चीजें बीनकर हर महीने लगभग ढाई हजार रुपए कमा लेते हैं। फिलहाल तो एनजीटी ने इस प्रोजेक्ट पर फिलहाल रोक लगा दी है और मामले में अगली सुनवाई 27 अगस्त को रखी गई है।
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