कई कंपनियों के साथ चल रहे टैक्से विवाद को खत्मव करने के लिए रेट्रो टैक्सा रोलबैक बिल लोकसभा में पेश किया गया। इस संशोधन प्रस्तामव के मुताबिक, पुरानी तारीखों से कैपिटल गेन पर टैक्स वसूली का नियम खत्म होगा।
वहीं सरकार पुराने वसूले गए टैक्स वापस कर सकती है, इसमें ब्याज शामिल नहीं होगा। कंपनियों को लिखित में देना होगा कि आगे कोई क्लेम नहीं करेंगी। बता दें कि वोडाफोन, केयर्न सहित कुल 17 केस में ऐसी टैक्सत वसूली को लेकर विवाद था।
क्या है रेट्रो टैक्स?
रेट्रो टैक्स कंपनियों के पूंजीगत लाभ पर कर लगाया कर है, जिससे केयर्न एनर्जी पीएलसी और वोडाफोन समूह जैसी ब्रिटिश फर्मों में गिरावट आई। साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफोन ग्रुप के इनकम टैक्स कानून की व्यासख्यान को सही माना था और कहा था कि कंपनी को हिस्से दारी खरीदने पर कोई टैक्सन नहीं देना है।
इसके बाद तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने फाइनेंस बिल में एक संशोधन का प्रस्ता व किया, जिसमें टैक्सव अधिकारियों को इस तरह की डील पर रेट्रो टैक्सर वसूली का अधिकार दिया गया। भारत सरकार और वोडाफोन के बीच यह मामला तकरीबन 20,000 करोड़ के रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स को लेकर था।
केयर्न एनर्जी पीएलसी के शेयर ट्रांसफर को लेकर भी इसी तरह का मामला था। केयर्न ने 2006 में अपनी भारतीय इकाई का बीएसई पर लिस्टक कराया था। पांच साल बाद सरकार ने एक रेट्रोस्पे्क्टिव टैक्सी कानून पारित किया और केयर्न पर 10,247 करोड़ रुपये के ब्याज और जुर्माना लगाया। यह मामला हेग के एक आर्बिट्रेशन ट्रिब्यू़नल मे गया, जहां दिसंबर 2020 में केयर्न एनर्जी के पक्ष में फैसला सुनाया गया।
निवेश को मिलेगा बढ़ावा
जानकारों का कहना है कि यह स्वागत योग्य कदम है और इससे अनुकूल निवेश के लिए भारत निवेशकों की पसंद बनेगा। निवेशकों के लिए टैक्स की दरें भी काफी आकर्षक हैं। पिछले कुछ वर्षों में देश में निवेश के लिए एक सकारात्मक माहौल बनाने के लिए सरकार ने बड़े सुधार किए हैं।
ईवाई के टैक्स पार्टनर प्रणव सयता ने कहा कि यह कर कानूनों में स्पष्टता लाता है, जिससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा अनावश्यक लंबे समय तक चलने वाले मुकदमे खत्म होंगे। कंपनियां अब बिना किसी कर लागत या दंड के मामले निपटा सकेंगी।
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