नयी दिल्ली| उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसने एक बैंक के अध्यक्ष एवं क्षेत्रीय प्रबंधक को तलब किया था।
शीर्ष अदालत ने कहा कि सार्वजनिक कर्तव्य का निर्वहन कर रहे अधिकारियों को तलब करना उचित नहीं है। शीर्ष अदालत प्रथम यूपी ग्रामीण बैंक एवं अन्य की तरफ से दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी।
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उच्च न्यायालय ने बैंक के अध्यक्ष को तलब किया था, ताकि उन्हें बताया जा सके कि बैंक के अधिकारी किस तरह से काम कर रहे हैं। एक कर्मचारी की सेवा समाप्त किये जाने के मामले पर सुनवाई कर रहे उच्च न्यायालय ने बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक को भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था और हलफनामा दायर कर बताने के लिए कहा था कि बैंक में कितने लोग दैनिक भुगतान के आधार पर काम कर रहे हैं।
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न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमणियन की पीठ ने अधिकारियों को तलब किए जाने पर नाखुशी जताई और कहा कि उच्चतम न्यायालय पहले ही अधिकारियों को अदालत में समन किए जाने के खिलाफ टिप्पणी कर चुका है।
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